हॉं मैं जड़ हूं…

हॉं मैं जड़ हूं… हॉं मैं जड़ हूं…चेतन को जन्म देने वाली, हॉं मैं जड़ हूं….समस्त भार उठाने वाली मैं अवयक्ता मैं परिपक्ववता मैं अल्हड़ता मैं समत्वता, मैं जीवनदायनी मैं मुक्तिवाहनी मैं अचल मैं अटल नाम की होड़ में मैं नहीं कहीं ,काम की दौड़ मे मैं हर कहीं क्या मिला क्या खो दिया बही … Read more

नदी

नदी मैं नदी जीवनदायनी तप्त हुई,पर उड़ चली रिमझिम बरसी हर तरफ खिलखिलाती बह चली बिखेरती धन धान्य हर तरफ पर्वतों को चिरती चट्टानों से टकराती अनवरत कोशिश करती,उमड़ चली मजि़ल की ओर जब कभी जकड़ी गयी प्रचंड बन मैं लड़ पड़ी विथ्वंस मैं भी दे गयी वरदान नहरों के समान मिल गयी सागर में … Read more

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